ग्रेटर नोएडा वेस्ट में रहने वाले लाखों लोगों के लिए अच्छी खबर है। ग्रेटर नोएडा वेस्ट मेट्रो प्रोजेक्ट को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। नोएडा मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (NMRC) के अनुसार, मेट्रो कॉरिडोर का प्रस्ताव सार्वजनिक निवेश बोर्ड (PIB) के सामने पेश किया गया है और इसे सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। अब इस परियोजना को अंतिम मंजूरी के लिए केंद्रीय कैबिनेट के पास भेजा जाएगा।
यदि कैबिनेट से मंजूरी मिल जाती है, तो जल्द ही इस परियोजना पर टेंडर जारी किए जाएंगे और अगले साल इसकी निर्माण प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है।
ग्रेटर नोएडा वेस्ट मेट्रो प्रोजेक्ट का विवरण:
| विषय |
जानकारी |
| परियोजना |
ग्रेटर नोएडा वेस्ट मेट्रो |
| संचालन एजेंसी |
NMRC |
| कुल लंबाई |
8.4 किमी (प्रस्तावित) |
| अनुमानित लागत |
लगभग ₹900 करोड़ |
| शुरुआत |
नोएडा सेक्टर-51 |
| अंतिम स्टेशन |
ग्रेटर नोएडा वेस्ट सेक्टर-4 |
| प्रस्तावित स्टेशन |
5 |
| वर्तमान स्थिति |
कैबिनेट मंजूरी का इंतजार |
कैबिनेट की मंजूरी के बाद शुरू होगा अगला चरण
NMRC अधिकारियों के मुताबिक, ग्रेटर नोएडा वेस्ट मेट्रो परियोजना का विस्तृत प्रस्तुतीकरण PIB के समक्ष किया गया। बैठक के दौरान परियोजना की आवश्यकता, अनुमानित लागत, यात्री संख्या और कनेक्टिविटी जैसे कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा हुई। अधिकारियों का कहना है कि अब संबंधित मंत्रालयों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रस्ताव केंद्रीय कैबिनेट के सामने रखा जाएगा। उम्मीद है कि अगले डेढ़ महीने के भीतर इस परियोजना पर अंतिम फैसला हो सकता है। कैबिनेट की मंजूरी मिलते ही निर्माण कार्य के लिए टेंडर जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
सेक्टर-51 से सेक्टर-4 तक बनेगा नया मेट्रो कॉरिडोर
नई योजना के अनुसार यह मेट्रो कॉरिडोर करीब 8.4 किलोमीटर लंबा होगा। यह मेट्रो लाइन नोएडा सेक्टर-51 मेट्रो स्टेशन से शुरू होकर ग्रेटर नोएडा वेस्ट सेक्टर-4 तक जाएगी। इस कॉरिडोर पर कुल 5 मेट्रो स्टेशन प्रस्तावित हैं। सेक्टर-51 स्टेशन के जरिए यात्रियों को सीधे दिल्ली मेट्रो के ब्लू लाइन नेटवर्क से बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। इससे नोएडा, ग्रेटर नोएडा वेस्ट और दिल्ली के बीच सफर पहले की तुलना में अधिक आसान और तेज हो जाएगा। इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 900 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
लाखों लोगों को मिलेगा सीधा फायदा
ग्रेटर नोएडा वेस्ट तेजी से विकसित हो रहा रिहायशी क्षेत्र है, जहां बड़ी संख्या में लोग रहते हैं। यहां से रोजाना हजारों लोग नौकरी, शिक्षा और अन्य कामों के लिए नोएडा और दिल्ली आते-जाते हैं। नई मेट्रो लाइन शुरू होने के बाद सेक्टर-4 और आसपास की कई हाउसिंग सोसायटी के निवासियों को बेहतर सार्वजनिक परिवहन मिलेगा। सड़क पर ट्रैफिक का दबाव भी कम हो सकता है और यात्रा का समय घटने की उम्मीद है।
पहले लंबा था रूट, अब बदली गई योजना
शुरुआती योजना में मेट्रो लाइन को नॉलेज पार्क-5 तक ले जाने का प्रस्ताव था। उस समय पूरे कॉरिडोर की लंबाई अधिक थी और लगभग 11 मेट्रो स्टेशन बनाए जाने थे। इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 2,991 करोड़ रुपये थी।
पुरानी और नई योजना में अंतर:
| पहले की योजना |
नई योजना |
| नॉलेज पार्क-5 तक मेट्रो |
सेक्टर-4 तक मेट्रो |
| लगभग 11 स्टेशन |
5 स्टेशन |
| लंबा कॉरिडोर |
8.4 किमी कॉरिडोर |
| लागत लगभग ₹2991 करोड़ |
लागत लगभग ₹900 करोड़ |
| नई DPR से पहले |
संशोधित DPR के बाद |
कब शुरू हो सकता है निर्माण कार्य?
NMRC के अनुसार, यदि कैबिनेट से समय पर मंजूरी मिल जाती है, तो परियोजना के लिए टेंडर जारी किए जाएंगे। इसके बाद अगले वर्ष जनवरी-फरवरी के आसपास निर्माण कार्य शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि, फिलहाल परियोजना को अंतिम कैबिनेट मंजूरी मिलना बाकी है। मंजूरी मिलने के बाद ही निर्माण की आधिकारिक समय-सीमा और आगे की प्रक्रिया स्पष्ट होगी।
ग्रेटर नोएडा वेस्ट मेट्रो परियोजना पूरी होने के बाद नोएडा, ग्रेटर नोएडा वेस्ट और दिल्ली के बीच यात्रा पहले से अधिक सुविधाजनक होने की उम्मीद है। खासकर रोजाना ऑफिस जाने वाले यात्रियों और स्थानीय निवासियों को इससे बड़ा लाभ मिल सकता है।














