क्लाइमेट सेंट्रल की बुधवार को आई रिपोर्ट में यह बात कही गई है। इसके मुताबिक, जलवायु से नींद प्रभावित होने वाले दुनिया के प्रमुख हॉटस्पॉट में भारत भी शामिल है। दक्षिण भारत के शहरों में इस वजह से सालाना 78 से 91 घंटे तक नींद कम हो रही है। इनमें 8 से 9 घंटे का नुकसान सीधे जलवायु परिवर्तन से जुड़ा है।
गर्म रातें छीन रहीं सुकून की नींद
- तमिलनाडु में प्रति व्यक्ति सालाना 7.9 घंटे नींद कम हो रही है, जो देश में सबसे अधिक है।
- इसके बाद कर्नाटक (7.8 घंटे) और राजस्थान (7 घंटे) हैं। महानगरों में चेन्नई में सबसे अधिक 93 घंटे, मुंबई में 84 घंटे और कोलकाता में 80 घंटे की सालाना नींद का नुकसान दर्ज किया गया।
- रिपोर्ट के मुताबिक, खराब नींद से याददाश्त प्रभावित होती है।
- मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ सकता है। रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। दिल के रोगों का खतरा बढ़ता है। कार्यक्षमता घटती है।
- भारत में समस्या इसलिए गंभीर है कि घनी आबादी वाले शहरों में रात में भी गर्मी रहती है। इसका सबसे ज्यादा असर बुजुर्गों, महिलाओं, कम आय वाले परिवारों पर पड़ रहा है।






